सुकृत सवाल-जवाब
सेवा क्या है, और वही छोटे जवाब जो ऐप सेटिंग्स, मदद, सुकृत FAQ में देता है।
सेवा क्या है?
सेवा परमो धर्मः। बिना किसी स्वार्थ या दिखावे के असहाय, बेजुबान पशु-पक्षियों, रोगियों और दुखी जीवों की पीड़ा दूर करना ही सच्ची सेवा है।
क्या छोटी सेवा भी मायने रखती है?
हाँ, बिल्कुल। सेवा कभी छोटी या बड़ी नहीं होती। चींटियों को आटा या चीनी डालना, पक्षियों के लिए छत पर सकोरे में पानी भर कर रखना, या किसी भूखे कुत्ते-बंदर को आधी रोटी दे देना भी अपार कष्टों को दूर करने वाली महा-सेवा मानी गई है।
मैं किसकी सेवा कर सकता हूँ?
आप हर उस प्राणी की सेवा कर सकते हैं जो पीड़ित, भूखा, घायल या असहाय है: चाहे वह वानर, गाय, कुत्ते, गधे, सूअर, पक्षी, चींटी हों या कोई दुखी मनुष्य। ईश्वर समस्त जीवों में विद्यमान है, इसलिए प्राणिमात्र की निस्वार्थ सेवा ही वास्तविक ईश्वर सेवा है।
सेवा के कुछ उदाहरण क्या हैं?
भोजन या पानी देना, घायल जीव की देखभाल करना, ज़रूरतमंद की सहायता करना, पेड़ लगाना या जल-स्रोत की रक्षा करना।
क्या सेवा का धार्मिक होना ज़रूरी है?
नहीं। सेवा का किसी विशिष्ट धार्मिक कर्मकांड से बंधा होना ज़रूरी नहीं है। मानवता और निष्काम संवेदना ही सेवा की आत्मा है। जहाँ मानवता है और किसी जीव के प्रति दया का भाव है, वही सबसे बड़ा मंदिर और सच्चा धर्म है।
क्या सेवा के बदले कुछ पाने की अपेक्षा रखनी चाहिए?
बिल्कुल नहीं। सेवा हमेशा निष्काम और निस्वार्थ होनी चाहिए, बिना किसी फल, नाम, यश, प्रशंसा या स्वार्थ की लालच के। बिना किसी अपेक्षा के किया गया कर्म ही स्वीकृत होता है और बड़े से बड़े संकटों को काटता है।
क्या सेवा दर्ज करना ही सेवा है?
नहीं। सुकृत सेवा को याद रखने में मदद करता है; सेवा तो उस अच्छे काम को करने में है।
सुकृत में अपनी सेवा क्यों दर्ज करें?
ताकि आप अपने सेवा-कार्यों को याद रख सकें और किए गए सत्कर्मों पर मनन कर सकें।
शुरुआत करने के लिए क्या कोई बड़ा काम करना ज़रूरी है?
नहीं, कोई बड़ा साधन या बहुत पैसा नहीं चाहिए। अपने घर के बाहर या छत पर पानी का डिब्बा रख देना, दो मुट्ठी दाना पक्षियों को डाल देना या चींटियों को थोड़ा सा आटा खिला देना ही एक महान शुरुआत है।
अगर मैं हर दिन सेवा न कर पाऊँ तो?
जिस प्रकार मनुष्य प्रतिदिन दो वक्त की रोटी खाकर अपने शरीर का पोषण करता है, उसी प्रकार निःस्वार्थ सेवा और सत्कर्मों से जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। सेवा में नियमितता उत्तम है, लेकिन यदि आप प्रतिदिन सेवा नहीं कर पाते, तो जब भी अवसर मिले, निष्काम भाव से सेवा अवश्य करें। क्योंकि सेवा की मात्रा से अधिक आपके भाव की पवित्रता और निःस्वार्थता मायने रखती है।
लिखना ज़रूरी है?
नहीं। सेवा लिखे बिना भी सेवा है।
फ़ोटो ज़रूरी है?
नहीं।
ग़लत लिख दिया?
अपनी एंट्री मिटा सकते हो। दूसरे की नहीं।
एक ही काम बार-बार?
हाँ। सुबह और शाम अलग एंट्री।
कौन बड़ा सेवक है?
ऐप नहीं बताती।
घायल की फ़ोटो?
घाव को कवर मत बनाओ। काम लिखो।
कुछ और पूछना है? support@sukritsetu.com पर लिखें।